आइए हम सुरक्षित ऋण और असुरक्षित ऋण के बीच के अंतर को समझें
| सिक्योर्ड या सुरक्षित क़र्ज़ | अन-सिक्योर्ड या असुरक्षित क़र्ज़ |
| असुरक्षित ऋण क़र्ज़ में आपको अपनी किसी भी संपत्ति को (जैसे घर, ज़मीन, गाडी इत्यादि) गिरवी रखना पड़ता है। यह संपत्ति आपके क़र्ज़ न चुका पाने की स्थिति में क़र्ज़ देयक द्वारा ले ली जाती है। इस गिरवी रखी संपत्ति को संपार्श्विक कहते हैं। | इस क़र्ज़ में आपको संपत्ति (जैसे घर, ज़मीन, गाडी इत्यादि) गिरवी रखने की ज़रुरत नहीं पड़ती है। इसके चुकता न कर पाने पर आपको अधिकतम ब्याज राशि का भार और जुर्माना सहना पड़ता है। |
| ऐसे क़र्ज़ बड़ी रकम (जैसे ₹2 लाख से ज़्यादा) के लिए होते हैं। | ऐसे क़र्ज़ छोटी रकम (जैसे ₹2 लाख से कम) के लिए होते हैं। |
| यह क़र्ज़ बैंक या क्रेडिट यूनियन से मिलते हैं।हम केवल एनबीएफसी, एमएफआई, स्थानीय साहूकार आदि के माध्यम से असुरक्षित ऋण का लाभ उठा सकते हैं। | यह क़र्ज़ आपको सूक्ष्म वित्त संस्थाएं या माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं से, बैंक से या पाथपेड़ी इत्यादि से मिल सकता है। |